इस वेबसाइट को सबसे अच्छी तरह देखा जा सकता हैMicrosoft इंटरनेट एक्सप्लोरर 9.0+,क्रोम,Firefox

English


  •  
  •  
SlideBar
CAPTCHA
Website Feedback

टाटा स्मारक केंद्र कैंसर के निवारण, इलाज और अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय स्तर का बृहत कैंसर केंद्र है और विश्व के इस प्रकार के किसी भी कैंसर केंद्र से तुलनीय है । सन 1962 से इस संस्थान के प्रबंधन का उत्तरदायित्व रखने वाले परमाणु ऊर्जा विभाग की दूर-दृष्टी और पूर्ण सहयोग के कारण ही यह उपलब्धि संभव हो पाई है ।

सन 1932 में, जब टाटा घराने की प्रथम महिला, लेडी मेहरबाई टाटा का, विदेश में उपचार के उपरान्त ल्यूकीमिया से देहांत हो गया तब सर दोराबजी के मन में यह विचार आया कि उन्हें भी भारत में कैंसर के इलाज हेतु इस तरह की सुविधाएं आरम्भ करनी चाहिए । दुर्भाग्यवश 1932 में, सर दोराब की मृत्यु हो गयी । उनके द्वारा की गयी प्रतिबद्धता इस स्तर की थी कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टीज ने विविध उत्कृष्ट कैंसर विशेषज्ञों के साथ मिलकर 1935 में एक ऐसे केंद्र की स्थापना करने के लिए खुद को समर्पित किया जिससे राष्ट्र को सामान्य लोकोपकार से भी अधिक लाभ होगा । टाटा घराने के इस लोकोपकारी संकल्पना और प्रतिबद्धता से सन 1941 में टाटा स्मारक अस्पताल नामक अस्पताल की संकल्पना का जन्म हुआ ।

टाटा स्मारक अस्पताल की शुरुआत सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट द्वारा 28 फरवरी 1941 को चिरस्थायी मूल्य तथा भारत की जनता के लिए चिंता के कारण से हुआ था । वर्ष 1952 में, मूल अनुसंधान के लिए एkक अग्रणी अनुसंधान संस्थान के रूप में ‘इंडियन कैंसर रिसर्च सेंटर’ की स्थापना की गयी – जिसे बाद में ‘कैंसर रिसर्च इंस्टिटयूट (सीआरआय)’ नाम दिया गया । 1957 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने अस्थायी रूप से टाटा स्मारक अस्पताल की भाग-डोर अपने हाथ में ली । 1962 में टाटा स्मारक केंद्र (टाटा स्मारक अस्पताल और कैंसर रिसर्च इंस्टीटयूट) के प्रशासनिक नियंत्रण का अंतरण परमाणु ऊर्जा विभाग को देना अगला बड़ा मील का पत्थर था । यह डॉ.होमी भाभा की दूरदर्शिता और पारखी नजर के कारण ही संभव हो पाया जिन्होंने यह परिकल्पना की कि इमेजिंग से लेकर स्टेजिंग और वास्तविक थेरपी तक कैंसर के इलाज में विकिरण (रेडियेशन) की अहम भूमिका होगी ।

इस संस्थान के निर्माण में डॉ.जे.सी.पेयमास्टर, डॉ.ई.बोर्जेस, डॉ.डी.मेहर-होमजी, डॉ.डी.जे. जस्सावाला, डॉ.वी.आर.खानोलकर, डॉ.के.जे.रणदिवे और कई अन्यों के योगदान को याद रखना आवश्यक है । हाल के दिनों में डॉ.पी.बी.देसाई, डॉ.आर.एस.राव, डॉ.एम.जी.देव, डॉ.ए.एन.भिसे और डॉ.के.ए.दिनशा ने इस प्रगति को गति दी है । परमाणु ऊर्जा विभाग तथा डॉ.एच.भाभा से लेकर डॉ.वी.साराभाई, डॉ.एच.एन.सेथना, डॉ.आर.रमन्ना, डॉ.एम.आर.श्रीनिवासन, डॉ.पी.के.आयेंगार, डॉ.आर.सी.चिदंबरम, डॉ.अनिल काकोड़कर और डॉ.श्रीकुमार बनर्जी जैसे उत्तरोत्तर आने वाले अध्यक्षों की सम्पूर्ण प्रतिबद्धता से केंद्र ने तेजी से अपनी गतिविधियाँ और व्यवहार में वृद्धि की हैं ।

टाटा स्मारक अस्पताल की वर्तमान गतिविधियाँ तथा विशेषज्ञता के विविध क्षेत्रों में श्रेष्ठता जिस स्तर पर पहुंचा है वह दर्ज करने योग्य है । लगभग 64,000 मरीज न केवल भारत से प्रत्युत पड़ोसी देशों से भी प्रति वर्ष अस्पताल आते हैं । कैंसर के इन मरीजों में से लगभग 60% मरीजों को अस्पताल में प्राथमिक देखभाल प्रदान की जाती है जिसमें से 70% से अधिक का मुफ्त इलाज किया जाता है । प्रतिदिन 1300 से अधिक मरीज वैद्यकीय सलाह, बृहत देखभाल या फोलो-अप इलाज के लिए ओपीडी में आते हैं । 15,363 sq. मीटर के एरिया में फैले 80 बेड के अस्पताल से बढ़कर 53,890 sq. मीटर के एरिया में फैले 629 बेड युक्त अस्पताल में इसका विस्तार हुआ है । 1941 में हमारा वार्षिक बजेट रु 5 लाख था – आज रु.200 करोड़ के करीब है ।

लगभग 18500 माइनर ऑपरेशन, 11500 मेजर ऑपरेशन और 200 लेसर सर्जरी प्रति वर्ष की गयी । 2014 में रोबोटिक्स सर्जरी आरम्भ की गयी और तब से 50 प्रक्रियाएं की गयी हैं । लगभग 6200 मरीजों को प्रतिवर्ष सुस्थापित इलाज प्रदान करने वाले बहु-आयामी कार्यक्रमों में रेडियोथेरपी और कीमोथेरपी देकर इलाज किया जाता है । वर्ष 2014 में रोबोटिक सर्जरी आरम्भ की गयी ।  

रेडियेशन थेरपी और कीमोथेरपी के साथ सर्जरी इलाज का एक महत्वपूर्ण रूप है । बहुत प्रगति हुई है जिसके परिणामस्वरूप शरीर के विविध स्थलों पर होने वाली बीमारी के ठीक होने में अत्यधिक सुधार हुआ है ।

सम्पूर्ण कैंसर देखभाल कार्यक्रम हेतु जल्द निदान, इलाज प्रबंधन, पुनर्वास, दर्द निवारण और अन्त्य देखभाल की एक बृहत एवं बहु आयामी पहुंच द्वारा रणनीतियाँ स्थापित की गयी हैं ।

प्रत्येक विशिष्टता में कई प्रगतियां हुई हैं । सर्जरी में, बदलती संकल्पनाओं ने कैंसर के जीव विज्ञान पर ध्यान दिया है । जीवन की गुणवत्ता के बहुत ही महत्वपूर्ण उद्देश्य यथा मरीज को जीवित रखने के परिणाम पर समझौता न करते हुए क्रियात्मकता और अवयव का संरक्षण करने हेतु परम्परागत सर्जरी का स्थान सुधारवादी सर्जरी ने लिया है । स्तन की प्रारम्भिक अवस्था के कैंसर या सॉफ्ट टिश्यु या हड्डी में होने वाले ट्यूमर में यह बात बहुत ही स्पष्ट रूप से साबित हुई है, जहां कम सुधारवादी प्रक्रियाओं ने अंगच्छेदन का स्थान लिया है । उच्च प्रौद्योगिकी, सूक्ष्मता, कंप्यूटरीकरण तथा थेरपी के लिए नवीनतम आयसोटॉप्स के प्रयोग द्वारा रेडियेशन थेरपी ने भी तीव्र प्रगति की है । क्लिनिकल ट्रायल्स में बहुत सी नई दवाईयों और क्लिनिकल प्रोटोकोल्स के जांच द्वारा कीमोथेरपी ने अहम भूमिका निभाई है ।

सन 1983 में टीएमएच, ब़ोन मेरो ट्रांसप्लांट आरम्भ करने वाला देश का पहला केंद्र था । बेहतर एन्टीबायोटिक्स का उपयोग करने, पौषनिक, ब्लड ट्रांसफ्यूशन सहयोग, नर्सिंग तथा अन्य क्षेत्रों में बेहतर सम्पूर्ण सहायक देखभाल के कारण यह संभव हो पाया है ।

पिछले कुछ वर्षों में, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्केनर तथा अधिक गतिशील रियल टाइम न्यूक्लियर मेडिसिन स्केनिंग के प्रयोग द्वारा रेडियोलोजिकल इमेजिंग तकनीक, प्रगति का दूसरा महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है ।

अधिक खतरा रखने वाले पूर्वलक्षणों को पहचानने के लिए भविष्यसूचक परख पर जोर देते हुए मूल हिस्टोपथोलोजी से मोलिक्यूलर पथोलोजी तक पथोलोजी की प्रगति हुई है ।

नवीनतम स्पाइरल सीटी स्केनर, गामा कमेरास, अल्ट्रासाउंड, माईक्रोस्कॉप, लीनियर एक्सलरेटर, सिमुलेटर, बॉन मेरो ट्रांसप्लांटेशन सुविधाएं, मरीजों की नाजुक अवस्था में देखभाल के लिए आयसीयू, उन्नत ऑपरेशन थीयटर, परिष्कृत ब्लड बैंक सुविधाएं तथा प्रयोगशालाएं सहित अत्याधुनिक उपकरण आज, प्रत्येक विभाग में उपलब्ध हैं । उच्च दर्जे के इम्मयुनोलोजिकल, हिस्टोकेमिकल, तथा प्रौद्योगिकीय स्तर के बायोकेमिकल, सायटोलोजिकल और पथोलोजिकल सेवायें प्रदान करने की हमारी क्षमता है ।

सम्पूर्ण पुनर्वास, और मरीजों को काउंसलिंग देकर सहायक देखभाल प्रदान करने को चिकित्सा के महत्वपूर्ण पहलु के रूप में मान्यता प्राप्त है । मरीज के पुनर्वास, फिजियोथेरपी, ऑक्यूपेशनल थेरपी, स्पीच थेरपी, मनोविज्ञान और वैद्यकीय समाज सेवा के क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम हुआ है ।

कैंसर के शीघ्र निदान, जांच और बीमारी के स्टेज को नीचे लाने में प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी की मुख्य एवं महत्वपूर्ण भूमिका है । मरीज को बीमारी की प्रारम्भिक अवस्था(स्टेज) में आना चाहिए और अधिक खतरा रखने वाले लोगों को सुग्राहित करना चाहिए तथा जल्द स्क्रीनिंग और जांच कराने हेतु कैंसर के रोग लक्षणों से अवगत कराना चाहिए । उपलब्ध संसाधनों के प्रभाव के सर्वोत्तम उपयोग हेतु जन शिक्षा और समुदाय आधारित कार्यक्रम को सशक्त बनाया गया है ।

बार्शी में एक सॅटॅलाइट ग्रामीण कैंसर केंद्र के जरिए कैंसर जागरूकता, निवारण और नियंत्रण के हमारे कार्यक्रम को अच्छी मान्यता प्राप्त है । हाल ही में, तंबाकू के लम्बे समय तक उपयोग के कारण होने वाले कैंसर के प्रभाव को विशिष्ट रूप से प्रस्तुत करने वाले जागरूकता अभियान, पूरे अस्पताल कॉमप्लेक्स में तम्बाकू के उपयोग पर निषेध, शैक्षणिक कार्यक्रमों के द्वारा स्कूल और कॉलेज के छात्रों को धूम्रपान करने के गंभीर प्रभाव तथा उन्हें यह आदत आरम्भ करने से भी रोकना, प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी विभाग में होने वाली कुछ गतिविधियाँ हैं ।

टाटा स्मारक अस्पताल,अपने अस्तित्व के 6 ठे दशक में, सदियों के कठिन एवं समर्पित परिश्रम के परिणामस्वरूप प्राप्त अपनी ही प्रतिष्ठा एवं विश्वसनीयता का शिकार हुआ है । एक संस्थान के सम्पूर्ण कार्यबल में शामिल लोगों की गुणवत्ता से ही उस संस्थान का आकलन किया जाता है । हमारी श्रेष्ठता पूर्णत:, कैंसर से लड़ने के उद्देश्य में सम्पूर्ण स्टाफ के निर्विवाद एवं परिपूर्ण समर्पण के कारण है ।

उच्चतम श्रेणी की कैंसर सेवा, अनुसंधान और शिक्षा में विश्वसनीय गुणवत्ता देखभाल प्रदान करना जारी रखने हेतु संस्थान की चिरकालीन प्रतिष्ठा का पूरी तरह से समर्थन करना जरूरी है ।

हमारा अस्पताल बहु-केंद्रिक अनुसंधान अध्ययन का केंद्र है, यह हमारे अस्पताल के स्टाफ की नैदानिक एवं वैद्यकीय श्रेष्ठता का नजराना है । वर्तमान में, बच्चों को होने वाले एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकीमिया तथा नॉन-होडकीन्स लिम्फोमा के इलाज के लिए एनसीआय, यूएसए के साथ मिलकर अध्ययन, फेफड़े के नियोप्लास्म तथा लिम्फेटिक एवं हेमोपोएटिक सिस्टम पर एक एपीडेमियोलोजिकल अध्ययन के लिए आयएआरसी, फ्रांस के साथ सहयोग तथा एनआयएच, वाशिंगटन के सहयोग से महिलाओं में प्रारम्भिक कैंसर को पहचानने के लिए एक बड़ा कोहोर्ट अध्ययन किया हैं । एक सुविधा के रूप में नवीन क्लिनिकल रिसर्च सेक्रटेरिएट, साइंटिफिक रिव्यू कमिटी तथा एथिक्स कमिटी की समीक्षा एवं मंजूरी के बाद इन सभी अनुसंधान गतिविधियों के निष्पादन और समन्वयन में मदद करती है । साथ-साथ, डब्ल्यूएचओ, यूआयसीसी और आयएईए के साथ शिक्षण और प्रशिक्षण के लिए अन्य अंतर्राष्ट्रीय सहयोग ने केंद्र, केंद्र के 200 डॉक्टर, 300 नर्स और 200 वैज्ञानिक अधिकारियों को मान्यता दिलाई है । किसी भी समय लगभग 150 युवा छात्र, चिकित्सा पेशेवर, वैज्ञानिक या तकनीकविद प्रशिक्षण एवं जारी शैक्षिक कार्यक्रम प्राप्त कर रहे हैं जो राष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान, कौशल और परामर्श प्रदान करते हैं ।

सूचना प्रौद्योगिकी में हाल ही में हुई उन्नति के अनुरूप, टाटा स्मारक केंद्र के पास सबसे उत्कृष्ट बृहत कंप्यूटरीकृत मेडिकल रिकोर्ड्स है तथा इलेक्ट्रोनिक मेल और इन्टरनेट सुविधाओं के विस्तार द्वारा संचार में सुधार किया गया है ।

हमारी सम्पूर्ण अवसंरचना की वृद्धि और उसपर दबाव पड़ने के कारणस्वरूप, मरीजों को कम से कम विलम्ब और असुविधा हो यह सुनिश्चित करने के लिए अस्पताल प्रबंधन के आधुनिक तकनीक आरम्भ करने की आवश्यकता है । इसलिए, सर्वोत्तम प्रदर्शन हेतु अपने कार्य-बल और वातावरण को अधिक जिम्मेदार बनाने के लिए हमने सभी क्षेत्रों में सम्पूर्ण गुणवत्ता प्रबंधन हेतु, हमारी सभी पद्धतियों और प्रणालियों की समीक्षा करने के लिए व्यावसायिकों को सन्निविष्ट किया है ।

कैंसर के आणविक आधार, सेल बायोलॉजी, मोलेक्युलर एपिडेमियोलॉजी, प्रेडिक्टिव असेय युक्त लेबोरेट्री मेडिसिन और मोलेक्युलर पैथोलॉजी को समझने में कैंसर अनुसंधान संस्थान एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । भविष्य के लिए उत्साहजनक संभावनाएँ प्रस्तुत करते हुए औषधियों से विकासशील चिकित्सा विज्ञान, विविध रणनीति का उपयोग करके इलाज के विविध प्रकार जैसे जीन थेरपी, टीका, जीव विज्ञान थेरपी और कीमो के निवारण का मूल्यांकन किया जा रहा है । डॉ.एम.जी.देव और डॉ.ए.एन.भिसे के अनुकरणीय काम तथा समर्पित नेतृत्व के परिणामस्वरूप, कैंसर अनुसंधान संस्थान को बहुत-से कार्य पहले करने का श्रेय जाता है । संस्थान ने कैंसर जीन थेरपी तथा ट्रांसजेनिक चूहों के विकास पर पथप्रदर्शक अनुसंधान किया है । सिर एवं गले के कैंसर, वायुपाचन नली, स्तन, गर्भाशय मुख और ल्यूकीमिया-लिम्फोमास पर इस संस्थान का अधिक महत्व रहा । मार्कर्स के रूप में उपयोग हेतु ऑन्कोजींस, ट्यूमर सप्रेसर जीन्स, तथा अन्य ग्रोथ फैक्टर जीन्स में होने वाले परिवर्तन को समझने का उद्देश्य इस संस्थान द्वारा जारी रखा गया । यह देखा गया है कि ल्यूकोप्लेकिया और मुंह के कैंसर के मरीजों के ऊतक में प्रोटीन के उत्पाद तथा लिपिड पेरोक्सीडेशंस और डीएनए-प्रोटीन क्रोस लिंक्स की मात्रा सुस्पष्ट रूप से उन्नत होती है जो तम्बाकू के सेवन से ऑक्सीकर तनाव के होने को सूचित करता है । सीआरआय में एड्स के लिए एक वेस्टर्न ब्लॉट किट विकसित किया गया है और देश के कई प्रयोगशालाओं में इसकी क्षमता की जांच की गयी है । मरीज की देखभाल, अनुसंधान और शिक्षा में उत्कृष्टता के मुख्य उद्देश्यों को टीएमसी सक्रिय रूप से जारी रखेगा । पर परेल के हमारे वर्तमान स्थल पर वर्धन में व्यावहारिक सीमाये हैं । भविष्य की जरूरतों और मांग को पूरा करने के लिए परेल में ही अवसंरचना और सुविधाओं का विस्तार करने हेतु बड़े प्रयास किए जा रहे हैं । विस्तारण, उन्नयन और आधुनिकीकरण कार्यक्रम हेतु एक समग्र पैकेज के लिए हम बड़ी निधियां (फंडिंग) प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं । वर्तमान बिल्डिंग और वार्ड्स के नवीकरण और पुनर्सज्जा के साथ-साथ हमें सभी विभाग और प्रयोगशालाओं में नवीन अत्याधुनिक उपकरणों का प्रापण करने की आवश्यकता है । देश के लिए मानव संसाधन और प्रशिक्षित कार्मिक तैयार करने के हमारे उद्देश्य को जारी रखने के लिए प्रोफ़ेशनल एजुकेशन डिविजन हमारे प्रशिक्षण, शिक्षा और शैक्षणिक कार्यक्रमों को सशक्त करेगा ।

कैंसर अनुसंधान के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास की गतिविधियों पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग ने खारगर, नवी मुंबई में कैंसर के उपचार, अनुसंधान और शिक्षण का प्रगत केंद्र (एक्ट्रेक) की स्थापना की है । नौवीं योजना में 71.28 करोड़ के बजेट परिव्यय से इस केंद्र को पूरा किया गया । ओवे गाव में 60 एकड़ जमीन पर स्थापित एक्ट्रेक का आरम्भ सन 1999 में हुआ ।

भारत तथा दक्षिण पूर्वी एशिया में प्रासंगिक कैंसर के लिए एक अत्याधुनिक अनुसंधान केंद्र तथा कैंसर के निवारण, अनुसंधान और इलाज के लिए एक मानित विश्वविद्यालय के रूप में इसकी योजना बनाई गयी है । एक संस्थान के जीवन में ऐसा समय आता है जब भविष्य के लिए दिशा निर्देश तैयार करने के लिए हमें अतीत पर अच्छी नजर डालने की जरूरत होती है । बदलते विश्व में, कोई संगठन स्थिर नहीं रह सकता है । भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए हमें आगे बढने की जरूरत है ।

अंतिम विश्लेषण में, एक संस्थान के सम्पूर्ण कार्य-बल में शामिल लोगों की गुणवत्ता से ही उस संस्थान का आकलन किया जाता है । कैंसर से लड़ने के लक्ष्य में उनके निर्विवाद एवं सम्पूर्ण समर्पण के कारण ही हमारी श्रेष्ठता है । टाटा स्मारक केंद्र की अतीत की उपलब्धियाँ यद्यपि गौरवपूर्ण है पर केंद्र उनके भरोसे पर न रहकर, जिन महानुभावों ने इस संस्थान की नियति का पथ प्रदर्शित किया है उनकी दृष्टी और समर्पण को नजराने के रूप में हमारे मरीजों को सहायता प्रदान करता रहेगा, उन्हें ठीक होने का, जीवन का तथा दर्द से आराम का सबसे अच्छा अवसर प्रदान करता रहेगा ।

हमसे संपर्क करें

टाटा स्मारक अस्पताल
डॉ ई बोर्जेस रोड, परेल, मुंबई - 400 012 भारत 
फ़ोन: +91-22- 24177000, 24146750 - 55
फैक्स: +91-22-24146937
ईमेल : msoffice@tmc.gov.in (रोगी देखभाल और प्रश्नों के लिए) / hrd@tmc.gov.in(प्रशासनिक के लिए - HRD मायने रखता है)

853363 (212)